बुधवार, 22 जुलाई 2009

संस्कर्ता का साहित्य ग्राम्य जीवन का भरोसे मन्द दस्तावेज-

महाजन
२१ जुलाई राजस्थान भाषा साहित्य एंव अकादमी तथा कालू विकास मंच की ओर मंगलवार को कालू के ओसवाल भवन में ख्यातनाम साहित्य कार नानूराम संस्कर्ता की जयंती समारेह पूर्वक मनाई गई। कार्यक्रम के मुख्य अतिथि राजस्थानी भाषा मान्यता संघर्ष समिति के प्रदेशाध्यक्ष हरिमोहन सारस्वत ने कहा कि नानूराम संस्कर्ता ग्राम्य जीवन के कुशल चितेरे थे। उनका साहित्य ग्रामीण जीवन की आकांक्षाओं व अवरोधों का प्रमाणिक दस्तावेज है। विशिष्ट अतिथि शिक्षाविद् मोटाराम चौधरी ने कहा कि संस्कर्ता के अप्रकाशित साहित्य को प्रकाशित करने की महत्ती आवश्यकता है ताकि शोद्यार्थी उनके सम्पूर्ण रचना संसार से परिचित हो सके। इस अवसर पर नानूराम संस्कर्ता के हिन्दी लेखन पर डॉ. मदनगोपाल लढा, राजलस्थानी काव्य पर किशनलाल पुरोहित, कथा साहित्य पर कमलकिशोर पिपलवा व व्यक्तित्व व कृतित्व पर रामजीलाल घोड़ेला ने पत्र वाचन किया। वरिष्ठ पत्रकार करनीदानसिंह राजपूत ने नानूराम संस्कर्ता के नाम पर राजस्थानी अकादमी से प्रतिवर्ष पुरस्कार शुरू करने की मांग की। कथाकार मनोज कुमार स्वामी ने राजस्थानी की संवेधानिक मान्यता को संस्कर्ता का अधूरा सपना बताते हुए उसे पूर्ण करने का आहवान किया। कार्यक्रम में पंचायत समिति सदस्य गोपाल चन्द ढुढाणी, पूर्व सरपंच दुर्गाराम शर्मा, डी. आर. खीची, राजूराम शर्मा आदि ने विचार व्यक्त किए। कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए पूव्र सरपंच इन्द्रचन्द राठी ने नानूराम संस्कर्ता के साथ अपने संस्मरण सुनाए। इससे पूर्व कार्यक्रम की शुरूआत नानूराम संस्कर्ता के चित्र के समक्ष दीप प्रज्ज्वलन से हुई। मंच संचालन करते हुए कमल किशोर ने संस्कर्ता की सुप्रसिद्ध रचना कळायण के दोहो का सस्वर वाचन किया। इस अवसर पर बड़ी संख्या में शिक्षक, साहित्यकार व ग्रामीण उपस्थित थे।

कोई टिप्पणी नहीं: